कहां गायब हुए 15 हजार लोग
। वर्ष 2005 से 2012 के दरम्यान 14283 लोग जबलपुर जिले से गायब हो गए। इसी तरह इस वर्ष के पिछले 4 माह में 722 लोग गायब हो गए हैं। लापता करीब 15 हजार लोगों में सैकड़ों की संख्या में बालाएं एवं बालक-बालिकाएं भी शामिल है। इतने बड़े और चौकाने वाले आकड़ों को देखते हुए मानव तस्करी का गढ़ जबलपुर होने की आशंका से ही पुलिस के आला अफसरों के प्रयास से मानव दुर्व्यापार सेल का जबलपुर में गठन किया गया। जहां सेल जबलपुर से लगे अदिवासी अंचलों से जबलपुर होकर आदिवासी बालाओं की तस्करी के साथ ही जबलपुर से बड़ी संख्या में छतरपुर, बांदा, सागर, राजस्थान और दिल्ली में महिलाओं और बच्चों को बेचे जाने की घटनाओं की पड़ताल कर रही है। इसके बावजूद बालक और बालिकाओं के लापता होने की गति में विराम नहीं लग रहा है। परिणाम स्वरूप पुलिस अधीक्षक हरिनारायणचारी मिश्र ने 1 अप्रैल से 30 जुलाई 2013 के दरम्यान लापता लोगों की खोज के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। क्राइम ब्रांच के निर्देशन में सभी थानों की पुलिस लापता लोगों की पतासाजी कर रही है। पुलिस सूत्रों का दावा है कि 1 अप्रैल से अब तक करीब 500 लोगों को खोज लिया गया है जबकि पुलिस अधीक्षक ने पदभार ग्रहण करने बाद से लगातार लापता लोगों की पतासाजी के प्रयास किए जिससे करीब 14 सौ लोग अभियान शुरू होने के पूर्व मिल गए है।
उल्लेखनीय है कि साल दर साल जहां लापता लोगों की संख्या बढ़ती गई। लापता लोगों को व्यौरा रखने जिला अपराध शाखा में विशेष सेल गठित है। नियमानुसार सेल में लापता लोगों का व्यौरा थाने से भेजना चाहिए लेकिन वर्षो से अस्पष्ट जानकारी एवं डाटा अपराध शाखा मे भेजे जा रहे थे। इसको मद्देनजर रखते हुए रिकार्ड दुरूस्त करने पिछले कई माह थानों में अभियान चला। परिणाम स्वरूप अब लापता लोगों का लगभग वास्तविक फिगर पुलिस के पास मौजूद है।
गुमइंसान कायम कर इतिश्री
वर्षो से पुलिस थानों में परम्परा चली आ रही थी कि गुमइंसान की सूचना आने पर पुलिस गुमइंसान दर्ज करने के बाद अपने कर्तव्य से इ्रतिश्री कर लेती थी लेकिन लापता लोगों की तलाश के लिए नियम यह है कि लापता व्यक्ति के मिलने के हर संभावित ठिकानों पर पुलिस जाकर जांच पड़ताल करें। उसके चित्र एवं हुलिया का प्रकाश कराया जाए।
व्यवस्था दुरूस्त की गई
जिले में लापता व्यक्तियों की तलाश के लिए व्यवस्थाएं दुरूस्त की गई लेकिन अब भी लापता की खोज में कमियां मौजूद है। पुलिस अधीक्षक स्वयं लापता लोगों के तलाश के अभियान की मानीटरिंग कर रहें है। थाना प्रभारी से लेकर खोजबीन अधिकारी से एक-एक गुम इंसान की तलाश में किए गए कार्य की जानकारी ली जा रही है।
दिसम्बर 2012 से जागी पुलिस
लापता लोगों की पतासाजी करने के लिए दिसम्बर 2012 से पुलिस जागृत हुई। इसके बाद अप्रैल 2013 तक वर्ष 2012 में लापता हुए करीब 380 लोगों को खोज निकाला गया। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग नहंी मिल पाए। इसके बाद अप्रैल मोह के बाद फिर एक बार जोरदार तरीके से खोजबीन का अभियान चलाया जा रहा है।
ूऐस मान लेती है मृत
लापता व्यक्तियों की नियमानुसार 7 साल तक खोजबीन की जाए। इसके बाद व्यक्ति नहीं मिलता है तो उसे मृत मानकर लापता का मामला फाइल कर दिया जाता है लेकिन कई प्रकरण ऐसे भी हुए है कि पुलिस ने जिनको मृत मानकर तलाश बंद दी थी और उन्हें मृत मान लिया था वे अचानक सामने आ गए। सूत्रों के अनुसार पुलिस नियमानुसार फाइलें बंद नहीं करती है।
बाक्स
मनी आया था 14 साल बाद
जबलपुर शहर में सिविल लाइन थाना क्षेत्र से लापता हुआ अधिवक्ता का पुत्र मनी बेदी करीब 14 साल बाद अचानक मिल गया। उल्लेखनीय है कि मनी के गायब होने के बाद उसके पिता ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। बेटे के अपहरण को लेकर रानी दुर्गावती विश्व विद्यालय के कई प्रोफेसरों सहित पुलिस विभाग के अधिकारियों पर भी अपहरण की आशंका को लेकर वाद न्यायालय में लगाए थे। पुलिस ने देश भर के समस्त गुरूद्वारा एवं बाल संरक्षण गृहों की खाक छान ली थी लेकिन मनी नहीं मिला था। यहां तक एक लावारिस बालक को मनी के रूप में पेश करने का भी असफल प्रयास हुआ था लेकिन कुछ माह पहले ही अचानक मनी घर लोट आया वह पजाब के किसी बाल संरक्षण गृह में रह रहा था। बाद में पिता से विवाद के चलते वह फिर पंजाब चला गया है।
मानव तस्करी की आशंका से अभियान
उल्लेखनीय है कि मानव तस्करी से जुड़ी आशंका के मद्देनजर
समूचे प्रदेश में गुमशुदा लोगों की दस्तयाबी के लिए
पुलिस अभियान चलाया जा रहा है। इसमें जबलपुर पुलिस को खासी सफलता मिली है। पुलिस ने दिसम्बर 2012 में 241 महिलाओं सहित 574 बालक, बालिका व पुरुषों की पतासाजी के दावे किए है।
उल्लेखनीय है कि जो लोग अपने बच्चों के लापता होने के बाद उनके ना मिलने से नाउम्मीद हो गए थे तथा पुलिस के रूचि न लेने से निराश थे। इस अभियान से उनकी उम्मीदें जाग गई। पुलिस कर्मी उनके दरवाजे पर दस्तक देकर लापता की खोजीबन के लिए नए सिरे से प्रयास शुरू कर दिए है।
ाान की घोषणा की थी।
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